केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को तेलंगाना के निजामाबाद में हल्दी उत्पादकों को राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board) की स्थापना पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि निजामाबाद कई दशकों से हल्दी की राजधानी के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब तक इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच नहीं हो पाई थी।
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 के चुनावों के दौरान राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board) की घोषणा की थी। इसका अधि सूचना अक्टूबर 2023 में जारी किया गया था और आज इसके अस्थायी मुख्यालय का उद्घाटन किया गया है।
अमित शाह ने कहा कि बोर्ड के संचालन शुरू करने से हल्दी किसानों को अब बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह बोर्ड कृषि से लेकर विपणन और निर्यात तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को संभालेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हल्दी का उपयोग सदियों से किया जा रहा है, और भारतीय महिलाएं इसे खाने में इसलिए इस्तेमाल करती हैं क्योंकि यह एंटी-वायरल, एंटी-कैंसर और एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन रोधी) गुणों से भरपूर होती है। इसके औषधीय गुणों के कारण हल्दी को दुनिया में एक चमत्कारी औषधि माना जाता है।
उन्होंने बताया कि भारत में 6% से 7.8% करक्यूमिन (Curcumin) सामग्री वाली हल्दी की किस्में भी उगाई जाती हैं। भारत ने ऑर्गेनिक हल्दी के उत्पादन और विपणन के लिए GI टैगिंग की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
अमित शाह ने कहा कि भारत ने 2030 तक एक अरब डॉलर मूल्य की हल्दी के निर्यात का लक्ष्य तय किया है।
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड(National Turmeric Board)
- राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board), हल्दी से संबंधित मामलों पर नेतृत्व प्रदान करता है और Spices Board औरअन्य सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय करके हल्दी क्षेत्र के विकास और विस्तार को बढ़ावा देता है।
उद्देश्य
- बोर्ड शोध एवं विकास, हल्दी उत्पादों में मूल्य संवर्धन, तथा मसाले के औषधीय एवं आवश्यक गुणों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- यह हल्दी की पैदावार में सुधार, रसद और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ाने तथा हल्दी के लिए नए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की खोज पर भी काम करेगा।
- बोर्ड किसानों को गुणवत्ता पूर्ण हल्दी की खेती करने का प्रशिक्षण भी देगा, जिससे निर्यात में कोई समस्या न आए।
- हल्दी उत्पादन और निर्यात के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना भी बोर्ड के अधिदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू होगा।
मुख्यालय: निजामाबाद, तेलंगाना
मंत्रालय: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन
भारत में हल्दी की स्थिति
- हल्दी, जिसे अक्सर “गोल्डन स्पाइस” के रूप में जाना जाता है, भारतीय किसानों के लिए अपार आर्थिक संभावनाएं रखती है, विशेष रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और मेघालय सहित 20 राज्यों के किसानों के लिए।
- हल्दी के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु हैं।
- भारतीय हल्दी के प्रमुख निर्यात बाजार बांग्लादेश, यूएई, यूएसए और मलेशिया हैं।
- भारत दुनिया के 70% से अधिक हल्दी उत्पादन के लिए जिम्मेदार है, देश में हल्दी की 30 किस्में उगाई जाती हैं।
- भारत में 2023-24 के दौरान 3.05 लाख हेक्टेयर का खेती क्षेत्र और 10.74 लाख टन का उत्पादन है।
- विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 62% से अधिक है। भारत में 2023-24 के दौरान 3.05 लाख हेक्टेयर का खेती क्षेत्र और 10.74 लाख टन का उत्पादन है।
- वर्ष 2023-24 के दौरान 226.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की 1.62 लाख टन हल्दी और हल्दी उत्पादों का निर्यात किया गया।
- वर्ष 2025 में हल्दी किसानों को 18,000 से 19,000 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य मिल रहा है, उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में इसमें 6,000 से 7,000 रुपये की वृद्धि होगी।